ज़िंदगी गुलज़ार है जिसकी, वोह फ़क़ीर है | बादशाह तो, रियासत की हिफाज़त में मसरूफ़ है | चमकता सूरज, महल की तारेकी के आगे बेबस है | और ये कुटिया तो, महताब से भी रोशन है |
અબજો માં એક, તુ કમાલ છે. મનુષ્ય જીવન ની ભેટ, તુજ ને પ્રાપ્ત છે. પણ દેખા દેખી ની દોડ માં, તુ સવાર છે. સોના ની હરોળ માં, શ્રમ નો બગાડ છે. વહી જાશે સમય ની ધારા, પલક ની એક ઝપક માં. જો ગુલામી ના ઘરેણાં થી, તુજ નો શૃંગાર છે. ખરચી જો બે પળ, તુ ખુદ ની ઓળખ માં. આ અમાસ ની રાત માં પણ, તુ એક ઝળહળતી મશાલ છે. અબજો માં એક ના એક નો આ સવાલ છે.
ज़िन्दगी की तारीख़ में, अपने समय की कीमत, क्या आंकते हो । जिम्मेदारियों के बहाने, क्या, हर रोज़, खुदको सुनाते हो । नाकामयाबी से डरते हो, इस सच को, क्यों झुठलाते हो । अपने नादान ख्वाबों को, जीवित रखने कि कोशिश, हर रोज़ करते हो । केवल सोने की मोहर ही, सफलता का एक, न पैमाना हो । आंखों की चमक, हसी की धनक, उम्मीद की खनक, इनका मोल, अनमोल हो । न हो झिझक, अंजान भविष्य की । हो बस मिठास, हर कण में, अपने परिश्रम की ।
मिला वो संजोग से, जुड़ा वो परछाई से, ख्यालों में उसका साया है, पर हाथों में न आया है । खिला वो कांटो में, चुभा वो फूलो में, ले गया जान वो, बस छोड़ गया सांसें वो । जीता रहा बूंदों में, बीता समय जुगो में, बना तीव्र चाहत वो, पर बना न आदत वो । दिन हो न रात हो, सांझ की न चादर हो, उम्र भर का न वादा हो, बस मेरे चेहरे में, तुम्हारी मुस्कुराहट का साथ हो ।